Wednesday, May 13, 2009

नित नए रंग में आता हूँ

नित नए रंग में आता हूँ , नित नए रूप दीखाता हूँ
अरे .. तुम सपनो तो बुनो मैं उन्हें साकार बनाता हूँ

तुम शोक में रहते हो क्यों पीडा सहते हो क्यों
बस एक बार मुस्कराकर तो देखो
मैं हँसी बन जाता हूँ नित नए रूप में आता हूँ

इन फूलों को देखो, जब पतझड़ इनका तन सुखा जाता है
तब इनके कोरे फलकों पर , मै ही तो जल बरसाता हूँ
मै रंगखिलाता हूँ ओउर देखों इनका रूप कैसा निखर जाता है

नित नए रंग में आता हूँ , नित नए रूप दीखाता हूँ
अरे .. तुम सपनो तो बुनो ,उन्हें मैं साकार बनाता हूँ

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