Wednesday, May 13, 2009

क्या लिखूं


कभी अकेलें में सोचता हूँ की कितनी दूर निकल आया हूँ
कितने लोग ओउर कितनी यादें पीछें छूठ गई ।
वो लोग जिन्होंहेने जाने अनजाने मुझ पर वोश्वास या अविश्वास किया , या वो जो शायेद मुझे इस लायक भी न समजे खैंर.......